
लाडली लक्ष्मियों के मामा शिवराज जबलपुर आए २४ दिसम्बर २००८ को ।फ़िल्म नायक की -तर्ज़ पर जबलपुर पधारे थे शिव जी । खबरें तो बहुत हैं जो स्थानीय तौर पर छापा और दिखाया गया । कुछ खबरें ऐसीं हैं जो न छपीं न दिखाईं गयीं उनमें से एक ख़बर ये कि
" शाम जब-"शिवराज सिंह चौहान -"अपनी रियाया को संबोधित कर शहीद स्मारक परिसर से बिदा हुए तो दिन भर से भैया के इंतज़ार में बैठी बहनों ने भोजन की गरज से महिला बाल कल्याण विभाग के स्टाल की ओर रुख किया , विभाग के अफसर खाना बटवा रहे थे इन बहनों के बीच एक छुटभैया अपनेलग्गू-भग्गूओं के साथ स्टाल पर पहुंचा । एक अफसर ने कहा -भाई,केवल महिलाओं के लिए इंतज़ाम है ....?
पास खडा दूसरा अफसर जो उस छुट भैये को जानता था ने उसे पुकारा : दिलीप बाबा आये हम आपको पैकेट देते हैं
अलग बैठाकर दिलीप बाबा को 5-6 पैकेट पकडा दिए यह कहते हुए -"भैया वाकई आप लोग बहुत भूखे हैं !"उस अफसर के बयान में एक गहरा अर्थ था जो मूर्ख दिलीप न समझ पाया ।
खाते-खाते बातों-बातों में कई अधिकारीयों को सस्पैंड करा देने की बात करने वाले दिलीप बाबा की नज़र हार्टीकल्चर विभाग के उखड़ते स्टाल पर पड़ी जहाँ चपरासी पौधे गाड़ी में रख रहा था , भैया दिलीप खाना छोड़ कर चपरासी के पास पहुंचे पौधों की मांग करने लगे । चपरासी ने बताया कि एक तो पौधे बिकाऊ नहीं हैं उनको जमा करना है। यदि कोई कमी होगी तो उसके वेतन से वसूला जाएगा , यह सुन कर बाबा का पारा हाई होने लगा। माँ-बहन की गालियाँ देते हुए बोले : जानता नहीं है किसकी सरकार है.....? सब समझ में आ जाएगा यदि ....ज़्यादा क़ानून बताया तूने ?
घबरा कर चपरासी ने कुछ पौधे उस आतंकी को दे दिए । पास में खड़े गुप्ता जी अपने मित्र तिवारी जी से कहने को मज़बूर हुए कि " सच कुत्ता गाड़ी के नीचे चलते चलते भ्रम पाल लेता है कि गाड़ी वही खींच रहा है....? सोचने लगता है कि बैल तो बैल ही होता है क्या कुछ कर पाता होगा ?
चित्र साभार: गूगल बाबा से
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