पी एम् इन वेटिंग आडवानी जी का अर्थ शास्त्र उस तथ्य का खुलासा साबित हुआ है जो कि आने वाले कलके भारत की दशा क्या होगी ? यानी उन लोगों के मुखौटे उतरने की पूरी -पूरी संभावना है जो देश भक्ति का लेबल लगा के सबके सामने रहे थे अब तक..स्विस बैंक में जमा 25 लाख करोड़ जो कुछ यूँ जमा है इस निर्णय का राजनैतिक लाभ आडवानी जी ने उठा ही लिया यह अलग बात है कि यह कदम जो विश्व व्यापी मंदी से जूझने के लिए सभी विकसित राष्ट्र उठा रहे हैं या आमादा हैं ।मेरी नज़र में ऐसा ही प्रधान मंत्री हो भारत का अगला प्रधान मंत्री जो सही वक़्त पर गेंद को बाउंड्री के बाहर कर दे.....ठीक बाउंड्री के बाहर ।
वामदल कभी भी इस मामले में आगे कदम उठाने में आगे न थे कांग्रेस के लिए तो स्विस बैंकों के बारे में सोचना बर्र के छत्ते को हाथ लगाने वाला मामला है।
बहार हाल यदि आडवानी जी आप ये चाहतें हैं कि आम आदमी खुशहाल हो तो प्रेम से स्विस बैंक से धन ले आइये जिसके भारत पर विदेशी क़र्ज़ से लगभग 14 गुना होने का अनुमान जानकार लोग लगा रहे हैं । और हाँ आडवानी जी आपकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को तमीज दार होना भी ज़रूरी है "क्योंकि आप जानतें हैं कि गाड़ी बैल ही खींचता है उसके नीचे चलने वाला कुत्ता नहीं !"
शहर को मत लपेटो भाई : ये उनकी है निजी लड़ाई
खुजा खता मत कीजिए मत दौडो जी तेज़
ब्लागिंग का समझो मरम, करलो यूज़ विवेक !
शहर नहीं बदनाम चार लोगन के कारन
बंद करलो अय मित्र अपना गाल बजावन
करलो यूज़ विवेक, बनो मत नाटक भैया
परसाई के शहर बहत है नरबदा मैया .
को शत शत नमन
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डाक्टर विजय तिवारी का आलेख
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सत्ता से दूर रहा जाना सियासयों को वैसा ही लगता है जैसा किसी ठण्ड से ठिठुरते किसी आदमी को दूर से अलाव दिखाई दे । मध्य-प्रदेश के एक अनुभवी युवा तुर्क सत्ता से दूर ठीक वैसे ही नज़र आ रहे हैं ।
उमा जी की जन शक्ति से मोह भंग होना था या सत्ता के ताप के नज़दीक जाने प्रहलाद जी के आतंरिक भाव जो भी हों ठिठुरन से बचने की कोशिश में लगे भाई साहब सिंगरौली के बाद कुछ कदम और चलसकतें हैं प्रहलाद भैया............?

प्रदेश में कमलोदय का सेहरा शिवराज मामाजी के माथे बांधना कई भाजपाई नेताओं को भले न भाये किंतु भाया तो मामा का का जादू ही है सबको ।
उधर कांग्रेस की पराजय पर चर्चा के लिए कोई वक़्त जाया क्यों करे जब मंत्रिमंडल गठन से ही मामाजी ने कईयों को मामा बनाया लोग इस पर सभी गंभीरता से चर्चा कर लेतें हैं । सियासत के हर आयाम के साथ नयी बात का नज़र आना स्वाभाविक है। कल जब गुरु जी के पराभव का समाचार मिला तो कईयों की कांय....कांय.... निकल पड़ी । कई वाह वाह कराने लगे.....?
उधर बूढ़े भारत में भी आयी फ़िर से नई...........की तर्ज़ पर अपने दादा शेखावत की हुंकार के राजनाथ सिंह के जोश में होश का बूस्टर डोज़ दे ही दिया.......
पाकिस्तान की डेमोक्रेसी की चर्चा की जाए तो पड़ोसी सियासत-दाँ और सियासत दौनो ही गोया टेरेरिस्ट के / आई एस आई के बंधक हो गए हैं बड़े निरीह लग रहें हैं। लगता है उनके देश में जन्में भारतीय पौराणिक कथानक भस्मासुर को बिदा भारतीय भगवान को अवतरित होना ही पडेगा....!!
और अंत में
पुन:



