नर्मदा  

प्रस्तुतकर्ता News Era

पुण्य सलिला मां नर्मदा
को शत शत नमन
"तेरे पद पंकज में रेवे सदा वन्दना मेरी मां "
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डाक्टर विजय तिवारी का आलेख
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साप्ताहिक झलकियाँ:प्रहलाद पटेल की वापसी के कयास  

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सत्ता से दूर रहा जाना सियासयों को वैसा ही लगता है जैसा किसी ठण्ड से ठिठुरते किसी आदमी को दूर से अलाव दिखाई दे मध्य-प्रदेश के एक अनुभवी युवा तुर्क सत्ता से दूर ठीक वैसे ही नज़र रहे हैं

उमा जी की जन शक्ति से मोह भंग होना था या सत्ता के ताप के नज़दीक जाने प्रहलाद जी के आतंरिक भाव जो भी हों ठिठुरन से बचने की कोशिश में लगे भाई साहब सिंगरौली के बाद कुछ कदम और चलसकतें हैं प्रहलाद भैया............?







प्रदेश में कमलोदय का सेहरा शिवराज मामाजी के माथे बांधना कई भाजपाई नेताओं को भले न भाये किंतु भाया तो मामा का का जादू ही है सबको ।
उधर कांग्रेस की पराजय पर चर्चा के लिए कोई वक़्त जाया क्यों करे जब मंत्रिमंडल गठन से ही मामाजी ने कईयों को मामा बनाया लोग इस पर सभी गंभीरता से चर्चा कर लेतें हैं । सियासत के हर आयाम के साथ नयी बात का नज़र आना स्वाभाविक है। कल जब गुरु जी के पराभव का समाचार मिला तो कईयों की कांय....कांय.... निकल पड़ी । कई वाह वाह कराने लगे.....?
उधर बूढ़े भारत में भी आयी फ़िर से नई...........की तर्ज़ पर अपने दादा शेखावत की हुंकार के राजनाथ सिंह के जोश में होश का बूस्टर डोज़ दे ही दिया.......
पाकिस्तान की डेमोक्रेसी की चर्चा की जाए तो पड़ोसी सियासत-दाँ और सियासत दौनो ही गोया टेरेरिस्ट के / आई एस आई के बंधक हो गए हैं बड़े निरीह लग रहें हैं। लगता है उनके देश में जन्में भारतीय पौराणिक कथानक भस्मासुर को बिदा भारतीय भगवान को अवतरित होना ही पडेगा....!!
और अंत में
पुन:

एक टुकड़ा धूप की ख्वाहिश ???
अपने भाई प्रहलाद पटेल की भगवान पूरी हो

बेडनियों की मादक अदाएं लुभा गयीं : भाजपा नेता को  

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जहाँ एक और देश भर में आतंक के साए से घबराए लोगों ने शोक में अपने नए साल के ज़श्न को स्थगित किया वहीं कीर्तिमान बनाने वाले लोग नर्मदा तट पर पेशेवर बेडनियों के नृत्य में सर से पैर तक डूबे रहे इतना ही नहीं सांस्कृतिक कार्य क्रम के नाम पे हुए इस आयोजन के बाक़ायदा कार्ड भी छपे,बँटे,और इस कार्यक्रम में शामिल हुए वे लोग जिनका सार्वजनिक जीवन कथित तौर जनता के लिए समर्पित है इसके पूर्व भी राज एक्सप्रेस ने प्रदेश के बेडनी नृत्य प्रेमी कांग्रेसी नेताओं पर विस्तार से समाचार प्रकाशित किया था. किंतु जबलपुर के भाजपाई नेताओं पर जबलपुर के मीडिया कर्मियों की नज़र नहीं गयी यदि गयी भी हो तो कौन जाने सदगुणी राजनैतिक पार्टी "भाजपा" के स्थानीय नेता गण अपने छोटे सरकारों की नकेल कसेंगें तो और भी करिश्में होगें इस बात का अंदेशा बना रहेगा