ओह मित्र
नव वर्ष तुम तो रुकोगे
पूरे एक साल
यही तुम हादसे न लाए तो मैं
३१ दिसम्बर २००९ की रात
००:०१ बजे तुम सादर विदा
करूंगा आज तुमको स्वागत की
घूस देना रास नहीं आ रहा
पचायती राज में आम जनता के बनाए सरपंचों के हाथों लग गयी चाबी जिससे वे गाहे बगाहे खोजने निकलते हैं हमारे सरपंच और उनके सचिव भाई । सरकारी निर्माण कार्यों जैसे स्कूल भवन,पुल,सी सी रोड , सामुदायिक भवन , सार्वजनिक शौचालय , आँगनवाडी,को अपनी पंचायत में कराने गला काट प्रतियोगिता जारी है। समूचे प्रदेश में यह क्रम एक सा जारी है। इन भवनों अथवा निर्माणों की गुणवत्ता का तो भगवान ही मालिक है। सब कुछ कागजों में सम्भव दिखाई देता है। कोई देखने वाला नहीं है..... और जो देखते हैं उनको मेनेज करना बाएँ हाथ का खेल है। पत्रकारों को भी मेनेज करने का दंभ भरने वालों में एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि ने कहा :-"सबसे आसान है इनको मेनेज करना "इन जनप्रतिनिधि महोदय को "सावन का अंधा ही कहा जाना ठीक होगा "
प्रदेश सरकार के मुखिया जी अब आप को इस मुद्दे पर भी गौर करना होगा तभी तो भ्रष्टाचार विहीन प्रदेश की कल्पना की जा सकती है।
इंदौर
इन दिनों सत्ता धारी दल के कुछ नेता गण पूर्व मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह की तर्ज़ पर आजकल इस बात की तुरही बजा रहें हैं कि सब कुछ खरीदा जा सकता है किंतु ऐसा न होता देख पिछले दिनों एक छुट भैये नेता ने पत्रकारों को बुला कर एक अधिकारी की आबरू लूटने की कोशिश की पहले तो पत्रकार उसके झांसे में आ गए कुछ किंतु अधिकारी भी तेज दिमाग था ..... उसने भी प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर कुछ कल्याण कारी योजनाओं की जानकारी दे । कुछ पत्रकारों नें जब नेता जी के "आबरू-लूटो" अभियान का जिक्र किया तो अधिकारी के बयान से कि अब तक जो भी हुआ या कराया गया है हम उसकी जांच कराउंगा दोषीयों की वाट लगाउंगा बांस उल्टे हो गए और चल पड़े बरेली को अब
दूसरी तरफ़ अखबारों के सम्पादकों ने फील्ड रिपोर्टरों को जम के डांट पिलाई "झूठे तथ्यों के आधार ख़बर लाओगे तो ख़बर ठीक न होगी तुम लोगों के लिए "
इन दिनों जबलपुर की एक महिला अधिकारी सविता कामले गले तक भ्रष्ट आचरण में डूबी हुईं हैं । जबलपुर जिले में जनपद पंचायत के अधिकारीयों को यूँ तो पोलिटिकल एजेंट कहा जाता है किंतु सब की सीमा को पार करने वाली महिला अधिकारी श्रीमती सविता कामले आजकल चर्चा मैं हैं । इन महोदया ने फर्जी तौर पर व्यापम की अंक सूचियां तैयार करा के अपने चहेतों को "संविदा-शिक्षक" बनवा दिया । इस साहसी काम में इन महोदया का संरक्षण कर रहे हैं जनपद पंचायत के अध्यक्ष श्री राजीव पटेल ।

लाडली लक्ष्मियों के मामा शिवराज जबलपुर आए २४ दिसम्बर २००८ को ।फ़िल्म नायक की -तर्ज़ पर जबलपुर पधारे थे शिव जी । खबरें तो बहुत हैं जो स्थानीय तौर पर छापा और दिखाया गया । कुछ खबरें ऐसीं हैं जो न छपीं न दिखाईं गयीं उनमें से एक ख़बर ये कि
" शाम जब-"शिवराज सिंह चौहान -"अपनी रियाया को संबोधित कर शहीद स्मारक परिसर से बिदा हुए तो दिन भर से भैया के इंतज़ार में बैठी बहनों ने भोजन की गरज से महिला बाल कल्याण विभाग के स्टाल की ओर रुख किया , विभाग के अफसर खाना बटवा रहे थे इन बहनों के बीच एक छुटभैया अपनेलग्गू-भग्गूओं के साथ स्टाल पर पहुंचा । एक अफसर ने कहा -भाई,केवल महिलाओं के लिए इंतज़ाम है ....?
पास खडा दूसरा अफसर जो उस छुट भैये को जानता था ने उसे पुकारा : दिलीप बाबा आये हम आपको पैकेट देते हैं
अलग बैठाकर दिलीप बाबा को 5-6 पैकेट पकडा दिए यह कहते हुए -"भैया वाकई आप लोग बहुत भूखे हैं !"उस अफसर के बयान में एक गहरा अर्थ था जो मूर्ख दिलीप न समझ पाया ।
खाते-खाते बातों-बातों में कई अधिकारीयों को सस्पैंड करा देने की बात करने वाले दिलीप बाबा की नज़र हार्टीकल्चर विभाग के उखड़ते स्टाल पर पड़ी जहाँ चपरासी पौधे गाड़ी में रख रहा था , भैया दिलीप खाना छोड़ कर चपरासी के पास पहुंचे पौधों की मांग करने लगे । चपरासी ने बताया कि एक तो पौधे बिकाऊ नहीं हैं उनको जमा करना है। यदि कोई कमी होगी तो उसके वेतन से वसूला जाएगा , यह सुन कर बाबा का पारा हाई होने लगा। माँ-बहन की गालियाँ देते हुए बोले : जानता नहीं है किसकी सरकार है.....? सब समझ में आ जाएगा यदि ....ज़्यादा क़ानून बताया तूने ?
घबरा कर चपरासी ने कुछ पौधे उस आतंकी को दे दिए । पास में खड़े गुप्ता जी अपने मित्र तिवारी जी से कहने को मज़बूर हुए कि " सच कुत्ता गाड़ी के नीचे चलते चलते भ्रम पाल लेता है कि गाड़ी वही खींच रहा है....? सोचने लगता है कि बैल तो बैल ही होता है क्या कुछ कर पाता होगा ?
चित्र साभार: गूगल बाबा से
जीवट मुख्य मंत्री जी की घोषणा भ्रष्टाचार विहीन प्रदेश का एलान शिव जी ने अच्छी परिकल्पना की है , माननीय शिव राज जी पटवारी से लेकर आप तक यानी सी एम् के ओहदे तक आपने तंत्र को करीब से देखा है । आपने जो देखा है उसमें एक संगठनात्मक व्यवस्था है। आप इसे तोड़ दें तो इससे बेहतर क्या होगा किंतु श्रीमान याद रखिए छोटे छोटे शिकार करने कराने से पहले बड़ी मछलियों पर जाल डालना ज़रूरी होगा। आपसे अनुरोध है कि शक्ति का दुरुपयोग किसी भी स्थिति में न होनें दीजिए । शेष फ़िर कभी
जबलपुर जनपद पंचायत रिकार्ड बनाने में माहिर है . पिछले चार बरसों से इस कार्यालय में कुछ ऐसा कमाल हो रहा है है जो देश के किसी भी सदन में . जनपद पंचायत के अध्यक्ष श्री राजीव पटेल , सचिव मुख्य कार्यपालन अधिकारी सविता कामले की देख रेख में समितियों की बैठकें संपन्न होतीं हैं . जिनमें महिला सदस्यों की उपस्थिति होती ही नहीं हैं उनके स्थान पर मीटिंग में उन महिला सदस्यों के पति गण बाकायदा उपस्थित ही नहीं होते रजिस्टर्स पर हस्ताक्षर किया करते हैं. इस बात की पुष्टि अनुविभागीय अधिकारी को सहज ही जनपद पंचायत के एक क्लर्क श्री दुबे द्वारा कराई है. सच बोलने के परिणाम स्वरुप बेचारा क्लर्क निलंबित है किंतु इन निर्वाचित जनप्रतिनिधियों तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी और अपनी जनपद-सदस्य पत्नियों के हस्ताक्षर करने वालों का बाल भी बांका नहीं हुआ है.रसूख के बल पर इस मुद्दे पर हो रही जांच की गति-धीमी की गयी है.
इस घटना से वे सारे निर्णय जो सदन में लिए गए न केवल अवैधानिक हैं बल्कि छल-कपट पूर्ण ही कहे जाएंगें


